पुनर्जागरण: कारण तथा प्रभाव

 यूरोप में पुनर्जागरण के कारण

यूरोप में पुनर्जागरण के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे —

1. धर्म युद्ध का प्रभाव —

 मध्य युग में तुर्को और ईसाइयों के बीच धर्म प्रचार व पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर कई सारे युद्ध हुए जिसमें ईसाइयों को भारी नुकसान हुआ। अपने धर्म और धार्मिक स्थल की रक्षा के लिए ईसाइयों ने बहुत सी यात्राएं की जिससे नए विचार एवं वातावरण से उनका संपर्क हुआ परिणाम स्वरूप उनके विचारों में प्रगति हुई अब उन्होंने चर्च और समाज के संबंध में व्यापक रूप से सोचना प्रारंभ कर दिया है जो कि पहले नहीं था जिससे पुनर्जागरण का वातावरण तैयार होना शुरू होने लगा। इस धर्म युद्ध के कारण ईसाई इस्लाम सभ्यता के संपर्क में आने लगे उन्होंने तुर्क जीवन शैली और रहन-सहन को देखा इसके बाद उनकी मानसिकता में बदलाव आने लगा और स्वतंत्र चिंतन की भावना का उदय हुआ परिणाम स्वरूप सामंतवाद के विरुद्ध पुनर्जागरण का जन्म हुआ।

2. तुर्कों का कुस्तुनतुनिया पर अधिकार होना —

इस्लाम धर्म का प्रचार और प्रसार करने के उद्देश्य से तुर्को ने 1453 ईस्वी में ईसाइयों के राजधानी कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लिया परिणाम स्वरूप पूर्वी यूरोप और बाल्कन क्षेत्र पर तुर्को का प्रभाव स्थापित हो गया तुर्क ने ईसाइयों पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया परिणाम स्वरुप इसाई विद्वानों ने अपने ज्ञान, विज्ञान और विभिन्न पुस्तकों की रक्षा करने के लिए इटली जा पहुंचे। उधर इटली में पहले से ही पुनर्जागरण का काल आरंभ हो चुका था फलत: इन विद्वानों को अनुकूल वातावरण मिल गया इस प्रकार इटली से जागरण का अभियान और तीव्र हो गया और परिणाम स्वरुप इटली से संपूर्ण यूरोप में ज्ञान-विज्ञान का प्रसार एवं प्रचार हुआ और इटली  ज्ञान का केंद्र बन गया।

3. छापेखाने का आविष्कार —

छापेखाने का आविष्कार के फलस्वरुप प्राचीन ज्ञान को सुरक्षित रखना सरल और सहज हो गया साथ ही नवीन ज्ञान विज्ञान को प्रसार करने में सुविधा हुई जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में लोग उससे परिचित होने लगे और उनको अपने पास सहेज कर भी रखने लगे अपने भविष्य के लिए उन किताबों को एकत्र कर रखने लगे जिससे एक नई क्रांति का जन्म हुआ। 1477 ईस्वी में विलियम कैक्टस इंग्लैंड में अपने  छापाखाना खोला जिससे पुस्तकों की छपाई का काम बहुत ही तीव्र गति से शुरू हुआ। और पुनर्जागरण शुरूआत हुई।
इस प्रकार नगरों का विकास, साहित्य के क्षेत्र में परिवर्तन, मानवतावाद का विकास,और वैज्ञानिकी परिवर्तन ने पुनर्जागरण को प्रेरित किया।

पुनर्जागरण का प्रभाव—

जब पुनर्जागरण का आरंभ हुआ तब संसार में विभिन्न परिवर्तन हो चाहे आर्थिक क्षेत्र में हो या समाजिक क्षेत्र में धर्म के क्षेत्र में भाषा में राष्ट्रीय में बहुततरीके से समाज में परिवर्तन हूं और इन सब परिवर्तनों का निम्न प्रभाव पड़ा—

1.आर्थिक दशा और व्यापार में प्रगति—

पुनर्जागरण के फल स्वरुप नए-नए देशों की खोज की गई इससे देश बाजार के रूप में प्रयोग किए गए उनसे कच्चे माल की उपलब्धता बनी सस्ते श्रमिक उपलब्ध होने लगे अतः इससे व्यापार एवं उद्योग का क्षेत्र विकसित हुआ पूंजीवाद और साम्राज्यवाद को बढ़ावा मिलने लगा फल का शोषण और वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई आर्थिक विकास के फल स्वरुप यूरोपीय देशों में संपन्न ता बढ़ी और लोगों का जीवन बिलासी हो गया यूरोप के सभी देशों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ गए धन कमाने की होड़ मच गई उपनिवेश की स्थापना होने लगी औद्योगिक नगरों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त बड़े-बड़े उद्योगों का विकास प्रारंभ हुआ और यह सब पुनर्जागरण के कारण हुआ इस काल में ही मध्यम वर्ग का उदय भी हुआ जिसमें वकील डॉक्टर इंजीनियर अन्य शिक्षित वर्ग के लोग सम्मिलित थे।

2. सामाजिक जीवन में परिवर्तन

पुनर्जागरण के फल स्वरुप ही मानव जीवन के दृष्टिकोण का व्यापक प्रभाव पड़ा अंधविश्वासी जीवन की सीमा से हटकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाने लगे सामंतवादी व्यवस्था समाप्त हो गई समाज में मध्य वर्ग का उदय हुआ जिससे राष्ट्र ताकि भावना विकसित हुई शिक्षा के प्रचार-प्रसार ने नए विचारों को जन्मदिन इससे समाज में नवीन जागृति और चेतना का संचार लोगों में सामाजिक कुरीतियों और बुराइयों के प्रति घृणा उत्पन्न हुई और वे अपने राजनीतिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए सचेत हो गए समाज में फैली और शिक्षा एवं अज्ञानता से छुटकारा मिलने लगा और यह सब पुनर्जागरण का प्रभाव था

3. भाषा और साहित्य पर प्रभाव

पुस्तकों की छपाई के कारण भाषा एवं साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा अनेक प्रस्तावना ए प्रकाशन होने लगी इस शिक्षा का भी प्रसार हुआ और ज्ञान का विस्तार होने ना सदियों पुरानी ज्ञानू को सहेजा जाने लगा और नए किताबें शहरों में बिकने लगी जिससे लोगों के जीवन दिन प्रतिदिन परिवर्तन होने लगा, भाषण में परिवर्तन होने लगा।

4. राष्ट्रीयता का विकास

जैसे ही समाज में मध्यम वर्ग का उदय हुआ समाज में राष्ट्रीयता की भावना बढ़ने लगी। मध्यम वर्ग के उद्देश्य सामंतवाद का अंत होने लगा और लोग अपने अधिकारों के लिए जागृत होने लगे जिससे राष्ट्र का विकास होने लगा।
        पुनर्जागरण के कारण काला परिवर्तन और धर्म सुधार जैसे आंदोलन का उदय भी हूं बहुत से लेखकों ने अपनी नई नई पुस्तकें लिखी अपने विचारों को प्रकाशित किया और यह सब पुनर्जागरण के कारण हुआ।

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